Monday, November 7, 2022

Mauli Mata Temple Fingeshwar (मौली माता मंदिर फिंगेश्वर )

 खदर से बनी छोफडी पर विराजीत मौली दाई 

Mauli Mata Temple Fingeshwar
मौली माता  मंदिर - फिंगेश्वर 

प्रवेश द्वार - मौली माता  मंदिर 

Mauli Mata Temple


मौली माता मंदिर परिसर का मनोरम दृश्य 

शिवलिंग मौली माता परिसर 

Phanikeshwarnath Mahadev Mandir Fingeshwar
फनिकेश्वरनाथ  शिव मंदिर फिंगेश्वर 


Tuesday, September 5, 2017

Kachna Dhurwa Temple,Gariaband (कचना धुरवा मंदिर जिला - गरियाबंद - छत्तीसगढ)

पराक्रमी वीर कचना धुरवा मन्दिर ग्राम-बारूका जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ) मे स्थीत है
यहा पर महान प्रतापि राजा कि यादे छुपि हूई है उसके साहस विरता और पराक्रम कि गाथा उस क्षेत्र  के कन कन पर बसी हुई है|
Kachna Dhurwa Gariaband

शत्रु उसका नाम सुनकर थर-थर कापने लगते थे छत्तीसगढ के वीरो का वह आर्दश था
कचना धुरूवा ने अपने राज्य मे न्यायपूर्ण शासन स्थापित किया ईस क्षेत्र मे उन्हे युग नायक के रूप मे प्रतिष्ठा प्राप्त हुई
Temple Of Kachan Dhurwa

Kachna Dhurwa Chhattisgarh

ईस क्षेत्र मे लोग उन्हे देवता के रूप मे मानते और उसकी पूजा करते है
गोंड जाति के लोगो के लिये तो भगवान स्वरूप ही है|

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Monday, September 4, 2017

Baba Kuti Ashram ,Fingeshwar - Chhattisgarh (बाबा कुटी आश्रम फिंगेश्वर ,गरियाबंद- छत्तीसगढ़ )

बाबा कुटी आश्रम जिसे माण्डव्य ऋषि आश्रम भी कहा जाता है यह आश्रम  गरियाबंद जिले के फिगेश्वर ब्लाक मे आता है जो फिगेश्वर  से काफि नजदीक लगभग 1  कि. मी. की दूरी पर राजिम र्माग मे सगन वनो के बीच मे है यह माण्डव ऋषि और बाबा श्री श्री 108 श्री सीया भुनेश्वरी शरण ब्याश कि तपस्या स्थिली है| 
ashram baba kuti fingeshwar

यहा बाबा कि कुटिया  मन्दिर  और उसकी यज्ञ शाला स्थित है यहा का वातावरन काफि रमनीय चारो तरफ घने वनो  से आश्रम घिरा हुवा है| यहा पर आके भक्तो को परम शांति का अनूभव होता है|

इस स्थान की मान्यता :-  कहा जाता है की भगवान  राम अपने वनवास के समय फिंगेश्वर के फनिकेश्वर नाथ महादेव की पूजा अर्चना किया था उसके बाद वहा  से  राजिम  गए थे यही बाबा कुटी जो रामायण कालीन माण्डव्य  ऋषि  का आश्रम था तब भगवान राम यहाँ पर रुके थे उनसे आगे का रास्ता पूछा था तथा गुरु का वंदन किया था तब से यह स्थान पावन तीर्थ के रूप में पूजा जाता है | 

यहाँ पर समय - समय धार्मिक अनुष्ठान होते रहते है | साथ ही यहाँ पर प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को स्नान ध्यान करके भोले बाबा की पूजा किया जाता है फिर आवला वृक्ष के निचे भोजन बनाया जाता है  जिसमे  आस पास के ग्राम के महिलाओं द्वारा  समूह में आवला भात खाया जाता है जिसमे भारी  संख्या में भीड़  देखने को मिलती  है|   

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Sunday, September 3, 2017

Ghatarani Temple And Waterfall ,Gariaband ( माँ घटारानी मंदिर )

छत्तीसगढ राज्य के गरियाबंद जिले के कोपरा नवापारा पाण्डुका क्षेत्र मे मां घटारानी का पवित्र धाम स्थीत है यहा माता को आदि शक्ति के रूप मे पूजा जाता है माता के दरबार मे भक्तो का ताता लगा रहता है
ghatarani waterfall

 माॅ विशाल चट्टानो के गुफा के अन्दर निवास करती है माता स्यमभू है स्थानिय लोग माता को वनदेवी के नाम से पुकारते है 
Ghatarani MATA mANDIR


GHATARANI CHHATTISGARH

TEMPLE OF GARIABAND


यहा पर माॅ के दरबार मे घने जंगल विशाल पर्वत पर पवित्र झरने कि कलकल ध्वनी सभी माता के भक्तो तथा पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करती रहती है यहा दूर दूर से शैलानीयो का आना जाना लगा रहता है यहा पर आके प्रकृति वातावरन से रूब रू होने का मौका मिलता है यह छत्तीसगढ के उत्तम पर्यटन स्थलो मे इसकी गणना किया जाता है यहा साल के बाकि दिनो कि अपेक्षा बरसात तथा नवरात्रि मे भारी भीड देखने को मिलती है
Maa Ghatarani

यहा माता के दरबार से 14  कि. मी. की दूरि पर आगे से बगल मे जतमई माता का मन्दिर स्थीत है यहि से आगे 35   कि मी कि दूरी पर कचना धुरवा के दर्शन करते हूवे भुतेश्वर महादेव विश्व का सबसे बडा प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन कर सकते है

कैसे पहुचे  - रायपुर से इसकी दूरी 91  कि. मी. है|  राजिम मार्ग से होते हुवे यहा पहुचा जा सकता है रास्ते उत्तम है साथ मे यहा के आस पास के स्थान पिकनिक के लिये उत्तम है|
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Thursday, August 17, 2017

Siva Temple Fingeshwar - Chhattisgarh (छः मासी रात का बना है यह शिव मंदिर)

अति प्राचीन है फिंगेश्वर का फनिकेश्वर नाथ शिव मंदिर छः मासी रात का बना है यह मंदिर बिना कलश का है यह मंदिर कलश स्थापित करने से पहले ही भोर  हो गया था इसलिए कलश को मंदिर के अंदर स्थापित कर  दिया गया है  : खजुराहो के सामान ही इसमें महीन से महीन नक्क्सी व  कामुक प्रतिमा का निर्माण किया गया है  इस मंदिर की निर्माण शैली भी अदभुद है| इस मंदिर को बनाने में विशाल चट्टानों को तरास कर इसमें प्रयोग किया गया है| यह मदिर अपने अंदर अनेको राज छुपाये हुवे है| इसे स्थानीय लोग  फिंगेश्वर का खजुराहो मंदिर भी कहते है|  
Siva Temple Fingeshwar

Fanikeshwar Nath - Siva Temple  Fingeshwar

Siva Temple Fingeshwar

Siva Temple Fingeshwar







इस मंदिर के सामने बेहद अधभुद पांच शिखरों  वाला मंदिर  है  मंदिर के अंदर राम जानकी ,हनुमान मंदिर अनेको देवी - देवताओ का मंदिर है  इस मंदिर परिसर में  जमीन के अंदर राजमहल  किला नुमा मिलता है जिसे उस समय के तात्कालिक राजा ने निर्माण करवाया था  अब उसमे   हमेश जल भरा रहता है | जो उस मंदिर का मुख्य आकर्सन का केंद्र है| मंदिर से थोड़ी दूर आपको जर्जर हालत में राज महल देखने को मिलता है|जिसे राजा का दरबार कहा जाता है  जो पुराने ज़माने की याद दिलाती है| यहा  दशहरा काफी हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है| जिसमे भव्य शोभा यात्रा निकाली जिसमे राजा के वंशज आज भी अपनी कुल देवी देवता की पूजा अर्चना करते है| जिसे शाहि  दशहरा कहा जाता है| 
   
फनिकेश्वर  नाथ  मंदिर को को पाच कोसी धाम के रूप में पूजा जाता है | इस स्थान पर वनवास के समय माता सीता ने शिव जी की पूजा अर्चना किया था | 
दूर दूर से भक्त सावन मॉस में यहाँ बाबा को जल से अभिषेक करने के लिए आते है| 

Ramai Path Temple Sorid khurd - Gariaband (रमई पाठ गादी माई मंदिर सोरिद अंचल )

दभुद है माँ सीता की प्रतिमा राम के परित्याग के बाद इस स्थान पर माँ का निवास था माता के दर्शन को भगवन राम,विष्णु,हनुमानजी ,गरुड़ जी ,शिव जी ,कालभैरो यहाँ पर आये थे ओर यही पर सब रम गए इसलिए इसका नाम रमई पाठ पड़ा |इस स्थान पर कुछ दिनों के पश्चात वाल्मीकि आये ओर माता को अपने आश्रम (तुरतुरिया ) ले गए वही पर लव - कुश की जन्म स्थली है|   

रमई पाठ सीता माई का मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सोरिद ग्राम में स्थित है|
माता का मंदिर घने जंगल व विशाल पहाड़ो के बीच में स्थित है भक्तो को माता के प्रती अटूट आस्था व प्रेम है
ramai path mandir sorid khurd

  6 वी सदी कि है यहाँ कि मुर्तिया  माता को किसने स्थापित किया इसका रहस्य अभी तक पता नही चल पाया है| स्थानीय लोगो कि जानकारी के अनुसार इस स्थान पर कभी किशी ऋषि ने यहा पर तप किया और माता कि आराधन किया था| फिर माता के आशीर्वाद से पवित्र छोटी गंगा का यहाँ उद्गम हुवा|
gadi mai mandir sorid anchal


माँ गादी माई सोरिद खुर्द-सोरिद कला

ramai path fingeshwar-Gariaband

sorid temple fingeshwar

sorid mandir chhattisgarh




इस स्थान कि महत्व :-
यहाँ पर माता रानी कि प्रतिमा 6वी  सदी का है| माता रानी को किसी ने स्थापित नहीं किया माता स्वयम्भू है| माता के मंदिर के समीप प्राचीन हनुमान जी कि प्रतिमा काले रंग कि शिला पर है उसके आगे भैरव बाबा कि प्रतिमा है| जो माता के सेवा मे तत्पर दिखाई देते है| इस स्थान को तपस्या स्थली के रूप में भी पूजा जाता है| यहाँ पर विशाल आम्र वृक्ष के निचे पवित्र गंगा का उद्गम हुवा है| जो सभी भक्तो कि प्याश बुझती है इसके जल को बहुत्र पवित्र माना गया है| इसी कि जल से माता रानी कि पूजा किया जाता है| साथ ही इसके जल को पीने के लिए उपयोग किया जाता है| यहा का जो जल श्रोत है वह भीषण गर्मी में भी नहीं सूखता है निरंतर बहती रहती है| यहा पर चैत्र क्वार कि नवरात्रि में माता को प्रसन्न करने के लिए भक्तो के द्वारा मनोकामना ज्योति जलाई जाती है साथ ही भंडारे का आयोजन किया जाता है|
 यहा पर माता के सम्मान में प्रती वर्ष मेले का आयोजन किया जाता है जिसमे भारी संख्या में लोग इस मेले में सामील होते है| यहाँ पर मन्दिर परिसर पर अनेक निर्माधीन मंदिर का निर्माण किया गया है जिसमे राम जानकी मन्दिर , दुर्गा माता मंदिर ,महादेव का मंदिर गंगा माता का मंदिर आदि प्रमुख है|
यहा पर एक विशाल वृक्ष पर गणेश भगवान कि प्रतिमा स्वयं अंकित होती जा रही है| जो काफी अदभुद है|
ganesh pratima ramai path

यहाँ पर अनेक मंदिर व सामाजिक भवन का निर्माण कार्य चल रहा है|

इस स्थान पर कैसे पहुचे :-

यह मंदिर राजिम से 33 कि.मी कि दूरी पर फिंगेश्वर से होते हुवे छुरा मार्ग पर सोरिद अंचल ग्राम पर ग्राम से १ कि.मी कि दूरी पर स्थित है| यह स्थान महासमुन्द से भी काफी नजदीक है महासमुन्द से राजिम फिंगेश्वर छुरा मोड़ मार्ग होते हुवे माता के दरबार में पंहुचा जा सकता है| अब यह स्थान पर्यटन स्थान के रूप में उभरता नजर आ रहा है इसका श्रेय वहा कि मंदिर समीतियो को जाता है| जो माता कि सेवा मे हमेश जुटे रहते है तथा निस्वार्थ भाव से माता कि सेवा करते आ रहे है|
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