Thursday, May 31, 2018

शिवलिंग से आती है तुलसी के पत्ते समान खुशबू { Prachin Shivling Sirpur }

Gandheshwar Shivling Sirpur सिरपुर  जहा शैव, एवं वैष्णव, धर्म के मिलन का प्रतीक प्राचीन नगरी सिरपुर जिसे शैव  व बुद्ध की नगरी भी कहा जाता है | यहाँ पर साईड नंबर 15  में उत्खनन के उपरांत एक ऐसा शिवलिंग प्राप्त हुवा है | जिसमें तुलसी के पौधे के सराखे की खुशबु निकलती रहती है | 

Gandheshwar Mahadev Sirpur

पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार यह  अनुमान लगाया गया है |की  यह शिवलिंग लगभग 2000  वर्ष पुराण है और यह छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे प्राचीन शिवलिंग में इसकी गणना की जाती है | सिरपुर में बहुत अधिक मात्रा में शिवलिंग मिलता है मगर यह शिवलिंग सबसे अनोखा है | 

mahadev in sirpur


sirpur ka itihas


GANDHESHWAR SHIVLING,CHHATTISGARH, STORY & HISTORY IN HINDI

इस शिवलिंग की लम्बाई 4  फिट और गोलाई 2 .5  फिट है | यह मंदिर पूरी तरह भग्न अवस्था में है | यहाँ पर प्रमुख शिव मंदिर गंधेश्वर महादेव मंदिर है | मगर इस प्राचीन शिवलिंग को उनके गुण  के अनुसार इसे गंधेश्वर महादेव का नाम दिया गया है | स्थानीय निवासी इसे प्रेम से चिकना महादेव के नाम से पुकारते है | यह शिवलिंग जिस शिलाखंड से बना है वैसे शिला का प्रयोग वाराणसी के काशी विश्वनाथ तथा उज्जैन के महाकालेश्वर  शिवलिंग के सामान है व चिकना है|  व काफी बड़ी है |  सिरपुर की और खुदाई में भव्य शिव मंदिर मिलने की बात विशेषज्ञों  द्वारा कही गयी | किसी -किसी  अंग्रेजी बुक में प्राचीन भव्य शिव मंदिर की बात सिरपुर में कही गयी है | 12 वी सदी में  यह सिरपुर अपनी समृद्ध अवस्था में रहा होगा उस समय भीषण भूकंप व  बाढ़  के प्रकोप ने पुरे नगर को तबाह कर दिया वर्ना  आज हमारे पास एक भव्य व सुन्दर नगरी वर्तमान पीढ़ी के पास होती |    

इनके भी दर्शन करे :-


Wednesday, May 23, 2018

Mata Kaushalya Temple in Chandrakhuri,Raipur (कौशिल्या माता मंदिर चंद्रखुरी )

Kaushalya Mata Temple in Chandrakhuri,Raipur


दुनिया का एकमात्र राम की जननी माता कौशिल्या का प्रसिद्ध  मंदिर छत्तीसगढ़ में स्थित है व  राजधानी से महज ३० कि.मी. की दुरी पर चंद्रखुरी नामक ग्राम पर सात तालाबों के बीच स्थित है| 

Kaushalya Temple  Chandrakhuri

तालाब के बीच पुल के माध्यम से मंदिर तक पंहुचा जाता है | बरसात के समय  मंदिर की शोभा देखने लायक होती  है|   मंदिर प्रांगम की सुंदरता  दूर से ही भव्य  दिखाई  देती  है|मंदिर के चारो तरफ अनेक  वृक्ष लगे हुए है तथा गार्डन  का निर्माण किया गया है | मंदिर प्रांगण में भक्तो को आकर्षित करने के लिए नाना प्रकार के निर्माधीन प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है | 

raipur tourism

maa Kaushalya Temple  Chandrakhuri

Kaushalya mata mandir chhattisgarh

cg temple


Kaushalya Temple  Chandrakhuri

उनमे से सबसे सुंदर विष्णु की शेष शैय्या में बनी  प्रतिमा है जो तालाब के बीच में स्थित है | वहा  तक सिर्फ तैर के पंहुचा जाता है |नवरात्रि के समय भक्तो की भारी  भीड़ देखने को मिलती है 
तथा भक्तो के द्वारा काफी संख्या में मनोकामना  ज्योति कलश जलाये जाती है तथा मनोकामना स्वरुप मंदिर के सामने के वृक्ष पर कपडे से लपेटकर नारियल बाधा  जाता है तथा मनोकामना पूरी होने  पर उसे वहा से निकाला जाता है | 

टिप :- माता के विश्राम के लिए दोपहर १ बजे से ३ बजे के बीच मंदिर पट बंद रहता है| इस स्थान को माता कौशिल्या का जन्म स्थान माना  गया है साथ ही रामायण कालीन सुखैन वैध्य का निवास स्थान भी बताया जाता है |  चंद्रखुरी फॉर्म से चंद्रखुरी की दुरी २ किलोमीटर है | क्युकी चंद्रखुरी फॉर्म तक ही बस सुविधा है उसके बाद ऑटो रिक्शा की मदद से मंदिर तक पंहुचा जाता है|      

Thursday, May 17, 2018

Chhattisgarh tourist places with photos (फोटो के साथ छत्तीसगढ़ पर्यटन स्थल )

 छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक स्थल,Historical sites of Chhattisgarh

राजिम

छ. ग. का प्रयाग काहा जाता है| माघपुर्णिमा से महाशिवरात्री तक मेला लगता है| राजिम को पाँच मंदिर कुलेश्वर  चम्पकेंष्वर ब्रम्हेंष्वर फिगेंष्वर पटेश्वर के कारण पंचकोषी धाम भी काहा जाता है|


Tourist places in Chhattisgarh


द्रविड स्थापत्य कला की पंचायतन शैली से निर्मित निर्माण 7 वी सदी मे निर्माणकर्ता  नलवशी  शासक राजिम
निर्माणकर्ता  नलवशी  शासक विलासतुंग जिर्णोद्वार  जगतपाल कल्चुरी शासक पृथ्वीदेव का सेनापति ने किया है | 

कुलेश्वर महादेव मंदिर

chhattisgarh tourist

महानदी पैरी सोंडुर के संगम पर निर्मित छ.ग शासक द्वारा पाचवें कुम्भ का दर्जा  दिया गया है|


बलौदाबजार जिला

शिवरीनारायण

Chhattisgarh Tourist place

माता शबरी की पावन धरा भुमि जिसें छ ग का जगन्नाथ  पुरी भी कहा जाता है| इस स्थान पर भगवान  राम ने शबरी के जूठे बेर खाये ते | और नवधा भक्ति प्रदान किया था|  महानदी शिवनाथ तथा जोंक के प्रयाग संगम पर स्थित है।

खरौद - छत्तीसगढ़ का काशी 

chhattisgar Tourist places

इसे छत्तीसगढ़ का काशी कहा जाता है | लक्ष्मनेश्वर मंदिर काफी प्राचीन है|  शिवरात्रि मे मेले का आयोजन किया जाता है|

गिरौदपुरी 
संत घासीदास का जन्म स्थली यहा स्थित जैतखाम की उचाई 77 मीटर हैं ।जिसकी तुलना कुतुममीनार से की जाती है।

Tourist places in Chhattisgarh

दामाखेडा
शिवनाथ तथा खारुण नदी के संगम पर सोमनाथ में स्थित हैं ।कबीर पंथीयो का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है|1903 में की गई है कबीर पंथीयो के  12 वें वंश गुरु  उग्रनाम साहब कें द्वारा की गई है| 

रायपूर जिला

चन्दखुरी
भगवान राम की माता कौशल्या का मंदिर स्थित है। रामायण काल के वैद्धय सुषेन का निवास क्षेत्र था ।

आंरग


छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक स्थल
tourist place in chhattisgarh
Bhand Deul Temple 

tourist place in chhattisgarh
Jain Temples Arang

छ ग की मंदिरो की नगरी कहा जाता है| यहा भांडलदेव मंदिर जैन तीर्थकार नेमिनाथ ,अजीतनाथ ,श्रेयांश की मुर्तिया स्थित है| राजा मोरजध्वज की राजधानी थी | 

 चम्पारण



छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल

महाप्रभु संत वल्लभाचार्य की जन्म स्थली है | और चम्पेश्वर नाथ शिव मंदिर है मंदिर काफी भव्य है| छत्तीसगढ़ मे शायद इससे वर्तमान निर्माधीन मंदिर नहीं है | चंपाझर (चम्पारण )के सभी आसपास ग्राम के लोग होलिका दहन नहीं करते है | तथा यहाँ के वन मे बिना चप्पल जुते  के जाया जाता है |


बिलासपुर
रतनपुर 1050 ई में कल्चुरी शासक रत्नदेव प्रथम ने यह नगर बसाया ।तलाबो की नगरी कहा जाता हैं। 

Religious sites of Chhattisgarh

महामाया मंदिर 
   निर्माणकर्ता रत्नदेव प्रथम स्थापना 11 सदी में 

रामटेंकरी मंदिर

chhattisgarh destinations

   निर्माण कर्ता बिम्बाजी भोसलें नें 18 वी सदी में कराया था।
सती चैरा 
भैरव बाबा मन्दिर 
लखनी मन्दिर 
तुलजा भवानी मन्दिर 

तलागाव 
रूद्रशिव की प्रतिमा की अस्ठमुखी प्रतीमा लाल बलुआ पत्थर सें निर्मित  11 जीवो प्रणियो के अंगो सें निर्मित है|  निर्माणकर्ता    शरभपुरीय शासक 
Ancient sites of Chhattisgarh

Chhattisgarh temples
Archaeological sites of Chhattisgarh

देवरानी जेठानी मंदिर 
छ. ग.का प्राचीन मंदिर गुप्तकालीन स्थापत्य कला का प्रतिनिधित्व  करता है निर्माण 5वी सें 6वी शताब्दी में 


chhattisgarh ke dham


लाल बलुआ पत्थर से निर्मित।

अमेंरीकापा 
   मनियारी नदी के तट पर शिवनाथ और मनियारी के संगम पर स्थित हैं । पुरातात्विक स्थल है।


मल्हार  बिलासपुर
chhattisgarh buddhist matrimony

शरभपुरी राजा प्रसन्नमात्र द्वारा लीलागर नदी के समीप स्थित है। यहा डिंडेश्वर मंदिर पतालेश्वर मंदिर 
 चतुर्भुजी नारायण की प्रतीमा सर्व प्राचीन मुर्ति मौर्य कालीन मुर्ति है।