Friday, November 3, 2023
Thursday, February 2, 2023
Saturday, March 21, 2020
Shivrinarayan Mandir Chhattisgarh ( शिवरीनारायण मंदिर ,जांजगीर चांपा -छत्तीसगढ़ )
Shivrinarayan Temple history in Hindi
छत्तीसगढ़ में एक ऐसा प्राचीन तीर्थ स्थल है|जिसका संबंध रामायण काल से जुड़ी हुई है।रामायण काल के कई रहस्य इस क्षेत्र में छुपी हुई है।जिसे आदिकाल से ही पुरषोत्तम तीर्थ , एवम् छत्तीसगढ़ का जगन्नाथ पूरी भी कहा जाता है।
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| शिवरीनारायण मंदिर |
इस तीर्थ की पूजा गुप्त प्रयाग के रूप में कि जाती आ रही है| जिसकी ख्यति दूर-दूर तक फैली हुई है| जिसे शबरीनारायण धाम के रूप में पूजा जाता है|त्रिवेणी संगम पर स्थित होने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है| संत मेले के दौरान इसमें शाही स्नान करते है।प्रतिदिन इस त्रीवेनी संगम पर 101बत्ती से सजी दीप से गंगा आरती कि जाती है|तथा भक्त जन त्रिवेणी संगम होने के कारण श्राद्ध तर्पण का कार्य करते है।
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| Sheorinarayan Temple |
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार भगवान राम का वनवास काल के दौरान, इस दण्डकारक क्षेत्र में ,माता शबरी से मुलाकात हुई , जहा पर भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर ,प्रेम सहित ग्रहण किये।जिस कारण इस क्षेत्र का नाम शबरी – नारायण पड़ा जिसे कालांतर में शिवरीनारायण के नाम से जाना जाता है|
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| शिवरीनारायण मंदिर ,जांजगीर चांपा -छत्तीसगढ़ |
ऐतिहासिकता (Historicity)
भक्त माता शबरी के पिता का नाम ,राजा शबर था| वह इस क्षेत्र के प्रभावी राजा थे| माता शबरी जन्म से ही परम विष्णु भक्त थी| राजा शबर ,शबरी का विवाह करवाना चाहते थे| परन्तु शबरी को विवाह करना पसंद नहीं था| जिस कारण वह एक दिन अपने घर का परित्याग करके, भगवान कि खोज में वन कि ओर निकल पड़ती है| उन्ही दिनों वह पम्पा नामक एक सरोवर के पास पहुचती है| जहा पर उसे एक आश्रम दिखाई पड़ता है|वह आश्रम मतंग मुनि का आश्रम था।माता शबरी उस आश्रम में जाकर | मतंग ऋषि से शरण मागती है | ऋषि ने अपने दिव्य दृष्टी से सबरी को विष्णु भक्त जानकर उसे अपने आश्रम से शरण देती है| ऋषि ने शबरी को अपनी शिष्या बनाया ,और शिक्षा दीक्षा देना प्रारंभ किया| और भक्ति मार्ग का रास्ता प्रसस्त किया | मतंग ऋषि कि गुरुकुल कि ख्यति दूर दूर तक फैली हई थी|
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शबरी माता मंदिर खरौद
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भगवान श्री राम वनवास काल के दौरान जब चित्रकूट में निवास कर रहे थे| उसी दौरान मतंग ऋषि ने अपना देह का त्याग किया, मरनोउपरान्त आश्रम कि सारी जिम्मेदारी शबरी को सौपी ,क्युकी शबरी परम तेजस्वी, विदुषी,और वैष्णव भक्ति मार्ग पर चलने वाली आचार्य थी|
ऋषि ने मृत्यु उपरांत गूढ़ रहस्य शबरी को बताते हुवे कहते है कि भगवान विष्णु का अवतार, मानव रूप में अयोध्या में दशरथ के पुत्र, श्री राम के रूप में हुवे है| उनके वनवास काल के दौरान इस आश्रम में आएगे ,तुम उनकी बड़ी श्रधा भाव से सेवा सत्कार करना जिससे तुम्हारा कल्याण होगा और मोक्ष कि प्राप्ति होगी एवं इस आश्रम का नाम लोग युगों युगों तक याद रखेंगे| ऐसा कहकर वह अपना प्राण त्याग देती है|
गुरु के आज्ञा अनुसार शबरी इस आश्रम का संचालन करती है|तथा प्रत्येक दिन भगवान के आने कि बाठ देखते रहती, आश्रम से रास्ते तक चुन -चुन के फूल सजाया करती थी| व भोग लगाने के लिए मीठे -मीठे फल कि व्यवस्था करती थी| ऐशा करते कई वर्ष बित चुके थे| माता नित- नित बूढी होती जा रही थी, मगर उसको विश्वास था कि,गुरु ने कहा है। तो, एकदिन भगवान इस आश्रम में जरुर आयेंगे ,आश्रम के कुछ शिष्य शबरी का उपहास किया करती थे| धीरे -धीरे एक-एक करके सभी शिष्य आश्रम छोड़कर चले जाते है|
कई वर्ष उपरांत, आखिर वह घडी आ गयी जब भगवान राम माता सीता कि खोज में वन वन भटकते हुवे साधारण मानव के रूप में माता शबरी के आश्रम में आते है | भगवान को अपने सम्मुख देखकर शबरी आत्म विभोर हो जाती है| उन्हें अपनी बूढी आखो पर विश्वास नहीं होता कि प्रभु उनके सम्मुख खड़े है| माता शबरी एक परम तपस्वनी थी उसने अपने योग
शक्ति के द्वारा प्रभू को पहचान लेती है| तथा दण्डवत चरणों में गिरकर लिपट जाती है|आसुवो कि धारा बहने लगती है| भगवान माता कि इस करुना भरी प्रेम से आत्म विभोर हो जाते है|
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| भगवान राम के चरण कमल |
शक्ति के द्वारा प्रभू को पहचान लेती है| तथा दण्डवत चरणों में गिरकर लिपट जाती है|आसुवो कि धारा बहने लगती है| भगवान माता कि इस करुना भरी प्रेम से आत्म विभोर हो जाते है|
माता शबरी भगवान राम को उचे आशन में बैठाती है| भगवान के आने कि ख़ुशी में शबरी अपनी शुध-बुध खो देती है| और भगवान का स्वागत सत्कार करने मे लग जाती है।भगवान को भूख लगी होगी कहके फल खिलाने को लाती है|मगर संजोग वस् उस समय मात्र बेर का ही फल उसके पास रहती है ,उसी को ही भगवान को खाने को देती है|
तभी अचानक विचार करती है कि कही ये बेर खट्टे ना हो और सहज भाव से मीठे बेर चयन करने के उद्देश्य से बेर को चख चख कर मीठे- मीठे बेर प्रभु को अपने हातो से खिलाती है| प्रभु उसके निश्छल प्रेम भाव से दिए फल ग्रहण कर आत्म विभोर हो जाते है, और आखो से अश्रु कि धारा निकलने लगती है| प्रेम भक्ति का श्रेष्ट उदहारण शबरी के इस प्रसंग को माना जाता है|
तभी अचानक विचार करती है कि कही ये बेर खट्टे ना हो और सहज भाव से मीठे बेर चयन करने के उद्देश्य से बेर को चख चख कर मीठे- मीठे बेर प्रभु को अपने हातो से खिलाती है| प्रभु उसके निश्छल प्रेम भाव से दिए फल ग्रहण कर आत्म विभोर हो जाते है, और आखो से अश्रु कि धारा निकलने लगती है| प्रेम भक्ति का श्रेष्ट उदहारण शबरी के इस प्रसंग को माना जाता है|
भगवान राम ने माता को आशीर्वाद स्वरुप नवधा ( नव प्रकार कि भक्ति मार्ग )सबरी को प्रदान करती है|, ये नव प्रकार कि भक्ति मोक्ष का मार्ग प्रसस्त करती है| शबरी ये ज्ञान पाकर धन्य हो जाती है|
आश्रम से प्रस्थान करते वक्त भगवान श्री राम के द्वारा शबरी से सीता जी के बारे में पूछती है|तब सबरी श्री राम को पम्पा सरोवर जाने को कहती है| जहा पर उसकी मित्रता सुग्रीव से होगी और माता सीता कि खोज में सहायता करेगी ऐसा बोलकर भगवान के चरणों में गिरकर बार बार प्रणाम कर ,योग अग्नि के द्वार अपनी देह का त्याग कर देती है| राम उनको परम गति प्रदान करते है|
जिस कारण इस क्षेत्र को माता शबरी की कर्म भूमि कहा जाता है।जिस कारण शिवरीनारायण धाम का माहत्म्य और बढ़ जाता है| आज भी छत्तीसगढ़ में शर्वर अथवा शबर जनजाति के लोग रहते है| जो माता शबरी को अपना वंशज मानते है| और उसकी पूजा अर्चना करते है| इसी आस्था स्वरुप इस क्षेत्र में अनेक मंदिर का निर्माण कराया गया है|
जिस कारण इस क्षेत्र को माता शबरी की कर्म भूमि कहा जाता है।जिस कारण शिवरीनारायण धाम का माहत्म्य और बढ़ जाता है| आज भी छत्तीसगढ़ में शर्वर अथवा शबर जनजाति के लोग रहते है| जो माता शबरी को अपना वंशज मानते है| और उसकी पूजा अर्चना करते है| इसी आस्था स्वरुप इस क्षेत्र में अनेक मंदिर का निर्माण कराया गया है|
शिवरीनारायण के प्रमुख मंदिर निम्न है।
नर नारायण मंदिर शिवरीनारायण(Nar Narayan Temple Sheorinarayan)
नर नारायण मंदिर शिवरीनारायण(Nar Narayan Temple Sheorinarayan)
लगभग 12 सदी ईसवी में निर्मित इस प्राचीन मंदिर का निर्माण राजा शबर के द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर में एक कुंड है
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भगवान नर नारायण शिवरीनारायण
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जिसे रोहाणी कुंड कहा जाता है|जो जमीन से ऊपर है। जिसमें हमेशा जल भरा रहता है,और भगवान राम के चरण उसमे डूबे रहते है।इस जल को अक्षय जल कहा जाता है। भगवान की इस दिव्य स्वरूप के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर काफी भव्य है| मंदिर का शिखर काफी उची है| मंदिर के अन्दर महीन से महीन नक्काशी किया गया है| मंदिर के मंडप के बायीं ओर भगवान लक्ष्मीनारायण कि एक प्राचीन प्रतिमा रखी गयी जो खुदाई से प्राप्त हुआ है| मूर्ति के चारो ओर विष्णु के दशावतार का सूक्ष्म चित्रांकन किया गया है| प्रवेश द्वार पर दण्ड ,चवर लिए विष्णु के द्वारपाल ,विष्णु के पार्षद शंख पुष्प लिए चक्रपुरुष खड़े है| यहाँ पर गंगा जमुना सरस्वती एवं प्रवेश द्वार पर लघु गणेश कि प्रतिमा उकेरी गयी है|
केशव नारायण मंदिर (keshav narayan temple Shivrinarayan)![]() |
keshav narayan temple
Sheorinarayan
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Chandrachud Mahadev Temple
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मंदिर के प्रांगन में भगवान के चरण चिन्ह है| और एक प्राचीन कुवा है | कुछ मंदिर देखरेख के आभाव में द्वस्त होते जा रहे है| मंदिर का आस पास का क्षेत्र अतिक्रमण का शिकार हो गया है|
जगन्नाथ मंदिर शिवरीनारायण (jagannath Temple Shivrinarayan)
जगन्नाथ मंदिर शिवरीनारायण (jagannath Temple Shivrinarayan)
इस मंदिर का निर्माण सन 1927 में मुख्य मंदिर के कुछ कदम कि दुरी पर पूरी के जगन्नाथ मंदिर के सामान बनाया गया है| यहा पर रथ यात्रा बढ़ी ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है| जिसमे भगवान का रथ खीचने के लिए लोग दूर- दूर से आते है| इसे भगवान जगन्नाथ का मूल निवास माना गया है|
मंदिर प्रांगन में अनोखा वट वृक्ष (Unique tree Shivrinarayan)
इस वट वृक्ष कि खासियत यह है कि, इसकी जो पत्ते है वो दोने के सामान आक्रति वाले होते है| जनश्रुति कि माने तो, माता सबरी ने इसी पेड़ के पत्ते तोड़कर दोने का निर्माण कर भगवान राम को “<बेर फल”> खिलाया था| तब से इस पेड़ के पत्ते दोने के आकर के होते है| ऐसा पेड़ पूरी दुनिया में कही और देखने को नहीं मिलेगा| लोग इस वृक्ष कि बड़ी ही आदर भाव से पूजा अर्चना करते है|व माता शबरी का उनकी बीच होने का अनुभव महसूस करते है| इस पेड़ को कृष्णवट, माखन कटोरी वृक्ष के नाम से संबोधित करते है| वृक्ष के बगल में एक मंदिर में गुरुवो कि चरण पादुका को बड़े ही आदर भाव से रखा गाया ही |भक्त इसकी पूजा करते है| मंदिर प्रांगन में माता शबरी का भगवान को बेर खीलाते हुवे निर्माधिन प्रतिमा का निर्माण करवाया गया है|
मंदिर प्रांगन में अनोखा वट वृक्ष (Unique tree Shivrinarayan)
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| Vat tree Shivnarayan |
शिवरीनारायण से ३ किलोमीटर कि दुरी पर खरौद नामक ग्राम में शबरी माता का मंदिर विद्यमान है| यह मंदिर सिरपुर के लक्ष्मन मंदिर के सामान इटो से बनाया गया है ,जो राज्य सरकार द्वारा संरक्षित मंदिर है| यही पर लक्ष्मनेश्वर महादेव मंदिर है| साथ ही प्राचीन इंदल (इंद्र देव )का मंदिर है| जो देखने लायक स्थल है |
शिवरीनारायण का भव्य मेला (Grand fair of shivarinarayan)
मंदिर परिसर पर हर वर्ष महाशिवरात्रि और माघ पूर्णिमा को भव्य मेले का आयोजन किया जाता है|जिसमे लाखो कि संख्या में जन सैलाब उमड़ता है| यह छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध माघी मेला माना जाता है|
कैसे पहुचे: –राजधानी रायपुर से इसकी दुरी 178 कि .मी .है | व बिलासपुर से इसकी दुरी 60 किलोमीटर है| रास्ते पक्की बनी हुई है| आस पास के सहरो से मोटर बस भी चलती रहती है| शबरी नारायण में ठहरने के लिए कई धर्मशाला बनी हुई है| व प्रतिदिन निशुल्क भंडारे का आयोजन किया जाता है|इस मंदिर समिति द्वारा गौशाला का संचालन किया जाता है,और इसकी खासियत यहा है, कि किसी भी गाय का दूध नहीं निकाला जाता है| शबरीनारायण से कुछ दुरी पर हनुमान जी का मंदिर है| उस स्थान को जनक पुर कहते है| नदी कि उस पार वट वृक्ष है जिसे विश्राम वट (विधौरी )के नाम से जाना जाता है| इस वृक्ष के निचे भगवान के चरण पादुका रखी गई है| यही भगवान राम ने विश्राम किया उसके पश्चात इस आश्रम में प्रवेश किया|
इनके भी जरूर दर्शन करे :-Wednesday, October 23, 2019
Shiv Mandir Narayanpur - Baloda Bazar { शिव मंदिर नारायणपुर ,जिला – बलौदा बाजार }
Ancient Shiva Temple Narayanpur
छत्तीसगढ़ के बलौदा बाज़ार जिले के अंतर्गत कसडोल के समीप महानदी के तट पर प्राचीन और धार्मिक महत्व का
स्थल है| जिसे नारायणपुर नामक ग्राम के नाम से जाना जाता है| यहाँ का प्रमुख
आकर्षण का केंद्र भव्य प्राचीन शिव मंदिर है|
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| शिव मंदिर नारायणपुर |
इस नगर कि प्राचीनता
यहाँ के मंदिरों में स्पस्ट देखी जा सकती है| यहाँ पर स्थित शिव मंदिर अपनी
स्थापत्य कला के लिए मशहुर है| स्थानीय लोगो कि माने तो, इस मंदिर का निर्माण
कलचुरी कालीन राजा के द्वारा 7 वी से आठवी शताब्दी के बीच कराया गया था|
History of Narayanpur Shiv Temple
मंदिर कि कारीगरी काफी
उन्नत है| यह पूर्वाभिमुखी शिवमंदिर ,जिसका निर्माण,लाल और काले बलुवा पत्थरो के इस्तेमाल से इस मंदिर का निर्माण किया गया है|
पत्थरो को तराश कर बेहतरीन से बेहतरीन प्रतिमा को उसमे उकेरा गया है| जो उस समय कि
उन्नत कारीगरी को बाया करती है|
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| Narayanpur Shiv Temple |
यह मंदिर एक बड़े से
चबूतरे पर 16 स्तंभों पर टिका हुवा है| मंदिर के गर्भ गृह में प्राचीन शिवलिंग
विद्यमान है|जो किसी मंदिर के शिखर के सामान दिखता है| प्रवेश द्वार पर अनेक देवी
देवतावो कि प्रतिमा का चित्रांकन किया गया है| मंदिर के बाहरी दीवारों पर विष्णु
के अवतारों का बारी- बारी से वर्णन किया गया है| साथ ही यक्ष गन्धर्व ,पशु पक्षी ,बेलबूटे
के साथ कामुक प्रतिमा को पत्थरो में तरासा गया है|जो खजुराहो के मंदिर के सामान
लगता है|
Ancient Shiva Temple Narayanpur -Baloda Bazar
मुख्य मंदिर के बगल
में एक और मंदिर है जो उचाई में थोडा कम है| जिसका प्रवेश द्वार मुख्य मंदिर से
ठीक विपरीत है| जिसके अन्दर अब कोई मूर्ति
नहीं है|
मंदिर के आसपास
खुदाई से प्राप्त हुई मूर्तियों को एक छोटा से संग्रहालय बना कर रखा गया है| इस
संग्रहालय में एक बड़े से मानव के आकार कि प्रतिमा है| जिसे स्थानीय निवासी राजा कि
मूर्ति बताते है|
इस मंदिर पर कभी भूकम्प
के झटके आया रहा होगा जिसके कारण मंदिर का कुछ भाग जमीन कि सतह कि ओर धस चूका है|
इसके बावजूद मंदिर कि स्थति बेहद अच्छी है| लेकिन दुर्भाग्य वह इस मंदिर पर पूजा
पाठ नही होता|कुछ लोग सावन माश में भगवान को जल चडाने आते है|यह मंदिर उपेक्षा का
शिकार हो गया है|
यह शिव मंदिर:- {{ पुरातत्व
विभाग(छत्तीसगढ़ )}} द्वारा संरक्षित ईमारत है|सूर्योदय से सूर्यास्त तक मंदिर के दर्शन कर सकते है|
इसको सुरक्षित तथा
आकर्षक बनाने के लिए मंदिर के चारो तरफ गार्डन बनाया गया है| तथा लोहे के ऐगल द्वार
चारो तरफ से घेरा करके रखा गया है| यहाँ का वातावरण बेहद शांत है| यहाँ आके कुछ पल
सुकन के बिता सकते है|
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| Shiv Mandir Narayanpur |
कैसे पहुचे :-
राजधानी रायपुर से 102 कि.मी,कसडोल से 12 किलोमीटर .तथा जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर एवम सिरपुर से 40 कि मी कि दुरी पर स्थित है|रास्ते पक्की बनी हुई है|साथ
ही महासमुंद से कसडोल तक बस सुविधा है| यह मंदिर मुख्य मार्ग से २ कि मी कि दुरी
पर विद्यमान है| यह प्राचीन धरोहर प्रचार- प्रसार के आभाव के चलते , लोग इस मंदिर
के बारे में नहीं जानते है|लेकिन जब से इसे पर्यटक ग्राम घोषित किया है| तब से कुछ
लोग मंदिर तक आ रहे है| मंदिर का प्रचार प्रसार होना अभी बाकी है|
बलौदा बाज़ार व उसके
आसपास के दर्शनीय स्थल:-
ये सभी धार्मिक स्थल बलौदा- बाज़ार के आसपास स्थित है|
Saturday, October 19, 2019
Lakshmaneshwar Mahadev Temple Kharod ( लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर खरौद )
छत्तीसगढ़ कि इस पावन धरा में ऐसे अनेको तीर्थ स्थल जो रहस्य से भरा पड़ा है| उसी में से एक तीर्थ स्थल है|
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| लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर- खरौद |
Lakshmaneshwar Mahadev Temple, Kharod ,Janjgir Champa-Chhattisgarh
जिसे खरौद कहा जाता है|यह एक प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी है | खरौद को छत्तीसगढ़ का काशी कहा गया है| यह वह स्थान है जिसका सम्बन्ध भगवान राम से जुडा हुवा है| भगवान राम ने यही पर खर और दूषण नाम के दो दैत्यों संघार किया था| और लक्ष्मण के द्वार शिवलिंग कि स्थापना कि गयी थी| इस शिवलिंग में एक लाख छिद्र है| जिसमे एक लाख
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| लक्ष्मणेश्वर महादेव |
छत्तीसगढ़ का काशी नगरी -खरौद
शिवलिंग के दर्शन होते है|इस शिवलिंग में आप जीतन जल डालोगे वह अन्दर समा जाता है| और जितना निकालो ख़त्म नहीं होता है| लोगो कि मानो तो इस शिवलिंग का जो पानी है वह पाताल लोक में जाता है| लक्ष्मण के द्वारा स्थापित होने के कारण इसे लक्ष्मणेश्वर महादेव ,लखनेश्वर महादेव (""लक्ष लिंग "")के नाम से जाना जाता है|
सवा लाख छिद्र वाला अनोखा शिवलिंग
इस शिवलिंग में सवा लाख चावल के दाने अर्पण करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है|
मंदिर के अन्दर दो शिलालेख है| गर्भ गृह से पहले दो स्तंभ है जिसमे| रामायण के कई प्रसंगों का चित्रांगन किया
गया है| मंदिर उचे पत्थर के चबूतरे पर स्थित है| मंदिर परिसर पर अनेक प्राचीन मुर्तिया है| मंदिर परिसर पर वहा की पुजारी की वंशावली लिखी गयी है| मंदिर के पीछे एक कुण्ड है|मान्यता है कि इसमें स्नान करने से सभी रोग दूर हो जाते है|सावन सोमवारी और महाशिवरात्रि में भारी जन सैलाब उमड़ता है| जिसमे अलग अलग क्षेत्र के लोग भगवान को जल अर्पण करने को आते है|यहाँ पर खर और दूषण कि नगरी होने के कारण इसे खरौद नगर कहा जाता है| यहाँ पर अनेक मंदिर है |तथा कई प्राचीन तालाब है| माता शबरी का प्राचीन मंदिर यही पर स्थित है| यह मंदिर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वार संरक्षित ईमारत है |
कैसे पहुचे :- रायपुर से इसकी दुरी 119 किलोमीटर ,बिलासपुर से 62 कि.मी.,कसडोल से 29 किलोमीटर और शिवरीनारायण से 02 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है|यह जांजगीर – चापा जिले के अन्दर आता है|नियमित रूप से बस ऑटो टैक्सी की सुविधा है| नजदीक ही निशुल्क शिवरीनारायण धर्म शाला है|
इन्हे भी जरूर देखे :-





















































