Thursday, August 1, 2019

Harishankar Temple History in Balangir Odisha (हरिशंकर मंदिर ओडिशा - बलांगीर )

Harishankar Temple History in Hindi

प्रकृति कि मनोरम वादियों में झरनों कि कलकल कि ध्वनी का आनंद लेना चाहते है तो हरिशंकर पधारे, यहाँ आकर आप प्राकृतिक वातावरण से रूबरू होने का मौका मिलता है| ओडिशा कि पावन धरा पर वैसे अनेक प्राचीन, दैवीय स्थल है | इन्ही में से एक तीर्थ जिसे हरिशंकर कहा जाता है|
Harishankar Temple

Harisankar Temple  Balangir & Gandhamardhan hills

भगवान राम वनवास काल के दौरान माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ यहाँ आये थे, रामके द्वारा भगवान शिव कि आराधना कि झरने के निर्मल जल से शिव का अभिषेक किया तब से यह स्थान हरी शंकर के नाम से विख्यात हुवा , पाण्डव अपने वनवास काल के दौरान कुछ समय यहाँ व्यतीत किये थे ?

Harishankar Mandir


विशाल पर्वत पर हरिशंकर जी का मंदिर है जिसे गंधमादन पर्वत क्षेत्र कहा जाता है, पर्वत से पावन कपिल धारा , पाण्डव धारा ,गुप्त धारा , भीम धारा तथा चाल धारा ये पाच पवित्र जलधारा इस पर्वत कि गोद से निकलती है | इनमे से पांचवी धारा के निचे गोकुण्ड है| कपिल धारा का प्रवाह अति तीव्र है | तथा पाण्डव धारा के पास पर्वत में पाण्डव कि ऊँची प्रतिमा चट्टानों पर बनी है| गुप्त धारा सीता कुण्ड में है| यह कुण्ड चट्टानों में बना है| तथा इसका जल हमेशा गरम रहता है| भीम धारा 40  फुट ऊपर से गिरती है | चाल धारा के निचे अथाह जल है| बांस कि चाल बनाकर इसमें स्नान किया जाता है| तथा गोकुण्ड के आसपास लोग बच्चो के मुंडन का केश प्रवाहित करते है|


harishankar temple And waterfall

इस गंधमादन पर्वत के अगले छोर पर श्री श्री नृसिंहनाथ जी का मंदिर है| पर्वत पर अनेक गुफाये एवं खंडहर विद्यमान है| इस खंडहरों पर कभी बौद्ध भिक्षुक साधना व  तपस्या किया करते थे| इन खण्डहरो को प्राचीन परिमलगिरी विश्वविद्यालय के अवशेष मानते है|

harishankar fall




मंदिर परीक्षेत्र में अनेक वानर विचरण करते रहते है| लोग बड़े ही प्रेम भाव से प्रसाद खिलाते है| एक बहुत बड़े, बाड़े में सैकड़ो कि तादाद में हिरने व बारहसिंघा,व  राष्ट्रिय पक्षी मोर(मयूर)के दुर्लभ दर्शन होते है| लोग यहाँ के जल से जल क्रीडा का लुप्त उठाते है|  


विशेष :- सावन के दौरान शिव भक्त दूर दूर जे जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते है एवं यहाँ के जल को अन्य शिवालय तक ले जाते है| महाशिवरात्रि को बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है|   

कैसे पहुंचे :- जिला मुख्यालय से इसकी दुरी 78 किलोमीटर है| एवं रास्ते पक्की बनी हुई है व नजदीक ही हरिशंकर रेलवे स्टेसन है| नुवापडा जिले से इसकी दुरी महज  62 किलोमीटर है|