Saturday, September 16, 2017

भगवान जगन्नाथ के मंदिर से जुडी कुछ रोचक तथ्य........

प्रारम्भ से पढ़ें…


मार्ग :-
पूर्वी रेल्वे कि हबड़ा- वाल्टेयर लाइन पर कटक से 29 मील दूर खुदरा-रोड स्टेशन है|वहा से एक लाइन पूरी तक जाती है| खुदरा - रोड पूरी २८ मील है| आसन सोल हबड़ा, मद्रास तथा तलचर से पूरी के लिए सीधी ट्रेने चलती है 

कटक ,भुवनेश्वर,खुदरा – रोड आदि से पूरी के लिए मोटर बसे चलती है पूरी स्टेशन से श्री जगन्नाथ जी का मंदिर लगभग एक मील है|

ठहरने का स्थान :-

पूरी में बहुत से मठ है| प्रायः सभी मठो में यात्री ठहरते है| अनेक धर्मशाला भी है|

पुरी मे जगन्नाथ मंदिर के अजुबेः-

(1) मंदिर के सिखर पर लगा झण्डा हमेसा हवा के निपरीत दिशा मे लहराता है।

(2) पुरी मे किसी भी जगह से आप मंदिर पर लगे सूदर्शन चक्र को देखोगे तो वह आपको सामने कि ओर ही लगा दिखेगा।
(3) जैसे की हम सबको पता है की दिन के समय हवा समुद्र से जमिन की तरफ आति है।और शाम के दौरान ईसके विपरीत लेकिन पुरी मे इसका विपरित होता है।

(4) आप कभी भी किसी पक्षी या विमान को मंदिर के उपर उडते हुवे नहि देखेगे।

(5) मंदिर की मुख्य गुम्बत कि छाया दिन के किसी भी समय दिखाई नही देती।

(6) मंदिर के अंदर प्रसाद पकाने के लिये भोजन की सारी सामग्री पूरे वर्ष के लिये भंडार घर मे रहती है। प्रसाद की एक भी मा़त्रा यानि एक भी कण कभी व्यर्थ नही जाती है।आप चाहे कितने भी लोग वहा जाये प्रसाद आपको जरूर मिलेगा चाहे कुछ हजार लोग हो या लाख प्रसाद सभी लोगो को खिला सकते है।

(7) मंदिर की रसोई घर मे प्रसाद पकाने के लिये 7 बर्तनो को एक दूसरे पर रखा जाता है। और लकडी के जलावन पर पकाया जाता है। ईस प्रकृया मे उपर मे रखी सामग्री पहले पकती है फिर क्रमशः नीचे कि बर्तनो कि सामग्री पकती है।

(8) मंदिर के मुख्य द्वार मे पहला कदम रखने पर सागर(समुद्र) द्वारा उत्पन्न किसी भी तरह कि ध्वनी नही सुनाई देति है। जबकी मंदिर के बाहर सुनाई देती है।


मंदिर से जुडी रोचक तथ्य:-

मंदिर कि उचाई 214 फिट है।

मंदिर का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग फिट मे फैला है।

प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के उपर लगी ध्वजा को मानव द्वारा उल्टा चढ कर बदला जाता है।

मंदिर कि रसोई दुनिया कि सबसे बडी रसोई घर है।

विशाल रसोई घर मे भगवान जगन्नाथ को चढाने वाले महाप्रसाद को बनाने 400 रसोईया एवं 200 सहकर्मी काम करते है। 

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