Monday, January 7, 2019

Tirathgarh waterfall ,Kanger Ghati in Bastar ( तीरथगढ़ जलप्रपात कांगेर घाटी - बस्तर छत्तीसगढ़ )

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तीरथगढ़ जलप्रपात
छत्तीसगढ़ कि सबसे उची झरनों कि बात किया जाये तो तीरथगढ़ जलप्रपात सबसे उचाई वाली झरनों में गिनती कि जाती है| 
Teerathgarh Falls
Teerathgarh Falls


Teerathgarh Falls
Teerathgarh Falls



Tirathgarh jalprapat
Tirathgarh waterfall

यह झरना 300 फुट ऊपर से पानी नीचे कि तरफ गिरता है | इसे कांकेर घटी के जादूगर के नाम से भी जाना जाता है| कांगेर और उसकी सहायक नदीया मनुगा और बहार मिलकर यह विशाल अधभूध जलप्रपात का निर्माण करती है| 

तीरथगढ वॉटरफॉल
तीरथगढ वॉटरफॉल

इस जलप्रपात से भारी गर्जना के सामान आवाज निकलती रहती है | जिसे सुनकर पर्यटकों का उत्साह और बड जाता है और बार बार इस स्थान पर आने का मन बनाते है|  

tirathgarh waterfall photo
तीरथगढ़ के झरना

प्राकृतिक प्रेमियों कि लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है| प्राकृतिक हरियाली के साथ-साथ पिकनिक कि लिए यह स्थान उपयुक्त है|  
  
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Sunday, September 2, 2018

Chitrakoot Jalprapat Bastar Chhattisgarh { चित्रकूट जलप्रपात बस्तर - छत्तीसगढ़ }

Chitrakoot jalprapat Bastar

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित यह चित्रकूट जलप्रपात जिसे भारत का नियाग्रा जलप्रपात कहा जाता
chitrakoot jalprapat bastar
chitrakoot falls chhattisgarh

है|  छत्तीसगढ़ के बेहद खूबसूरत जलप्रपात में इसकी गणना की जाती है। यह पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान  है। यहाँ प्रतिवर्ष लाखो की संख्या में देश विदेश के पर्यटक पहुंचते है | यह जलप्रपात इंद्रावती नदी में बनती है | , मन को मोह लेने वाला यह प्राकृतिक झरना , बस्तर की घने जंगल व प्राकृतिक की गोद मे स्थित है।

tourist place in dantewada

बस्तर - छत्तीसगढ़

Bastar Ka Jalprapat ,Chitrakoot Jalprapat


इसकी झरने की उचाई 90 फिट व नदी की लंबाई 264 किलोमीटर है|  मौसम के अनुकूल इसकी चौड़ाई कम ज्यादा होती रहती है।
tourist place in bastar


उद्गम स्थल :- ओडिशा के मुंगेर पर्वत धरमगढ़ ,तहशील कालाहांडी से निकलती है। व नेशनल हाइवे 30 को काटती हुई छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भद्रकाली नामक स्थान पर गोदावरी नदी में संगम होती है|  इसके किनारे जगदलपुर ,बारसूर ,भोपालपटनम नामक शहर स्थित है।
यह नदी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ के बीच सीमा रेखा बनानी है, यह नदी बस्तर की जीवन रेखा कहलाती है। यह बस्तर दंतेवाड़ा व बीजापुर तीनो जिले में बहती है। 
इसकी सहायक नदिया 
उत्तर की ओर से 
दक्षिण की ओर से
1 कोटरी 
1 तालपेरु
2 निबरा
2 चितवांगू
3 गुडरा
3 नंदिराज
4 बोरडिंग, 5 नारंगी 
4 डंकनी , 5 संखनी 


इस जलप्रपात को देखने का उत्तम समय 

Bastar Ka Jalprapat

इस झरने का आकर्षक नजारा मानसून के मौसम का समय उपयुक्त होता है जब नदी अपनी पूरी जोश व पूरे उफान के साथ गर्जना करते हुवे बहती है। व एक अनोखा अनुभव प्रदान करती है।इस झरने के समीप बस्तर जनजाति की अनेक कलाकृति बॉस व  लकड़ी से बनायी गयी सजावटी समान  अनेक मुर्तिया खिलौने बेहद कम दाम में स्थानीय निवासियों के द्वारा बेची जाती  है।यादगार स्वरुप  कुछ जरूर  खरीदना चहिये जिससे उसकी आजीविका चलती रहे व उनको प्रोत्साहन  भी मिलेगा रहेगा|  

इस स्थान पर कैसे पहुचे :- जगदलपुर से महज 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पर केवल सड़क मार्ग के  द्वारा ही पहुचा जाता है| 
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Thursday, September 28, 2017

Dhaskud Waterfall,Borid ,Sirpur-Mahasamund (धसकुड़ झरना बोरिद- सिरपुर -महासमुंद)

धसकुड़ झरना सिरपुर से 8 किमी की दुरी पर बोरिद गांव के घने जंगल में स्थित धसकुड़ में जहां पर मनोहारी झरना है। यहां प्रकृति का सौंदर्य देखते ही बनता है। यहां का जलप्रपात बरसाती पानी से बनता है| तथा  गर्मी के दिनों में इसका जल बहुत धीमी हो जाती है|  
Dhaskud Waterfall,sirpur
Dhaskud Waterfall Borid -Sirpur

पठार के ऊपर एक वट वृक्ष है| जिसमे एक चिमटा लगा हुवा है स्थानीय लोगो के अनुसार यह चिमटा किसने लगाया है उसके बारे में किसी को पता नहीं है| उसकी बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा करते है अब तो उस स्थान पर ग्राम वासी नवरात्रि में मनोकामना ज्योति जलाते है भक्तो का आना जाना बना रहता है| 

यही बोरिद ग्राम से प्रसिद्ध चांदा दाई (गोड़ गुफा )जिसे कुछ लोग नागार्जुन गुफा भी कहते है वहा जाया जाता है मगर रास्ते  दुर्गम है बहुत से नालो को पार कर उस स्थान में पंहुचा जाता है|
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Wednesday, September 27, 2017

Turturiya -Valmiki Ashram,Luv Kush-Birth Place(तुरतुरिया -वाल्मीकि आश्रम एवं लवकुश की जन्मभूमि)

यह एक ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान पाहाडो के बिच मे है। जिसमे महर्षि वाल्मीकि तथा श्री राम-लक्ष्मण की मुर्तियां है। उसके सामने एक मंदिर मे लव-कुश की युगल मूर्ति है। वहि पर्वत के उपर एक मंदिर मे वाल्मीकि मुनि तथा सीता जी की मूर्तिया है।

luv kush turturiya
गोमुख -तुरतुरिया 

 किन्तू पर्वत हिंसक पशुओ का भय होने से कम लोग ही जाते है।
मंदिर के पास पर्वत पर एक गोमुख बना है।उससे जल निकलता रहता है। ईस जल से बने नाले को लोग सुरसुरी नदि कहते है। गोमूख के जल श्रोत से तुरतुर की आवाज निकलती रहती है। जिस कारण यह स्थान का नाम तुरतुरिया पडा। गोमूख के पास प्राचिन विष्णु कि दो प्रतिमाये है। और एक शिवलिग भी हैै। यहा पर बौध विहार के अवषेश इस स्थान पर है। प्रतिमाये खण्डित अवस्था मे है। यहा पर अनेक प्राचिन प्रतिमाये देखने को मिलती है।
Valmiki Ashram Turturiya
महर्षि वाल्मीकि  आश्रम -तुरतुरिया 

यहा पर नवरात्री मे भक्तो द्वारा भारी मा़त्रा मे मनोकामना ज्योति जलाये जाति है।मंदिर समिती के द्वारा भण्डारे का आयोजन किया जाता है। यह क्षेत्र को परम पावन व मोक्क्ष दायिनी धाम कहा जाता है। क्योकि इस स्थान पर आदि शक्तिी मां सीता का निवास स्थान था। और परम प्रतापी भगवान राम के पुत्र लव कुश कि जन्म स्थिली है यहि उसने विद्या प्राप्त किया था।
turturiya luv kush
लव -कुश की प्रतिमा 


कथा:- तुरतुरिया के बारे मे कहा जाता है। कि भगवान श्री राम द्वारा परित्याग करने पर वैदेहि सीता को फिगेश्वर के समिप सोरिद अंचल ग्राम के(रमई पाठ )मे छोड गये थे वहि माता का निवास स्थान था सिता कि प्रतिमा आज भी उस स्थान पर है। जब मां सिता के बारे मे महर्षि वालमिकी को पता चला तो माता को अपने साथ तुरतुरिया ले आये और सिता मां यहि आश्रम मे निवास करने लगि वहि लव कुश का जन्म हूवा। 
luv kush Birth Place
माता गढ़ 

ram laxman sita-turturiya
राम लक्ष्मण 



turturiya in chhattisgarh
बुद्ध प्रतिमा 
कैसे पहुचे:- यह सिरपुर से मात्र 35 कि मी कि दूरि पर स्थीत है।यह बलौदा बाजार जिले के लवन परिश्रेत्र के विकासखण्ड कसडोल मे आता है। रायपुर से इसकी दुरी लगभग 140 कि मी के आस पास है।रास्ते पक्की बनि हूई है मगर आश्रम से 5  कि मी के पहले रास्ते कच्ची है और काफि घुमावदार है।यदि तुरतुरिया आना है। तो सुबह आना उचित रहता रास्ते दुर्गम है। साम के समय जंगलि जानवर निकलने का डर बना रहता है।  
यहा पर प्रतिवर्ष पौस पुन्नीमा को विषाल मेला लगता है। जिसमे भारी मात्रा मे जन सैलाब उमडता है। जो देखने लायक रहता है।  
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Sunday, September 3, 2017

Ghatarani Temple And Waterfall ,Gariaband ( माँ घटारानी मंदिर )

छत्तीसगढ राज्य के गरियाबंद जिले के कोपरा नवापारा पाण्डुका क्षेत्र मे मां घटारानी का पवित्र धाम स्थीत है यहा माता को आदि शक्ति के रूप मे पूजा जाता है माता के दरबार मे भक्तो का ताता लगा रहता है
ghatarani waterfall

 माॅ विशाल चट्टानो के गुफा के अन्दर निवास करती है माता स्यमभू है स्थानिय लोग माता को वनदेवी के नाम से पुकारते है 
Ghatarani MATA mANDIR


GHATARANI CHHATTISGARH

TEMPLE OF GARIABAND


यहा पर माॅ के दरबार मे घने जंगल विशाल पर्वत पर पवित्र झरने कि कलकल ध्वनी सभी माता के भक्तो तथा पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करती रहती है यहा दूर दूर से शैलानीयो का आना जाना लगा रहता है यहा पर आके प्रकृति वातावरन से रूब रू होने का मौका मिलता है यह छत्तीसगढ के उत्तम पर्यटन स्थलो मे इसकी गणना किया जाता है यहा साल के बाकि दिनो कि अपेक्षा बरसात तथा नवरात्रि मे भारी भीड देखने को मिलती है
Maa Ghatarani

यहा माता के दरबार से 14  कि. मी. की दूरि पर आगे से बगल मे जतमई माता का मन्दिर स्थीत है यहि से आगे 35   कि मी कि दूरी पर कचना धुरवा के दर्शन करते हूवे भुतेश्वर महादेव विश्व का सबसे बडा प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन कर सकते है

कैसे पहुचे  - रायपुर से इसकी दूरी 91  कि. मी. है|  राजिम मार्ग से होते हुवे यहा पहुचा जा सकता है रास्ते उत्तम है साथ मे यहा के आस पास के स्थान पिकनिक के लिये उत्तम है|
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Tuesday, August 15, 2017

Jatmai Ghatarani Temple,Gariyaband,Chhattisgarh (जतमई माता मंदिर गरियाबंद छत्तीसगढ़ )

जतमई माता मंदिर गरियाबंद छत्तीसगढ़ 
घने जंगलो चट्टानों झरनो के बीच में निवास करती है | माँ जतमई ,
jatmai temple
मुख्य मंदिर 

माता के दर्शन तथा झरनो का आनंद लेने के लिए लाखो कि संख्या में भक्त गन आते है | यह स्थान पर एक प्राकृतिक झरना है जो यहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र है| इसी के चलते यहाँ हर समय भक्तो का ताता लगा रहता है 
jatmai waterfalls gariyabandh
जतमई माता मंदिर 


jatmai temple chhattisgarh
 मंदिर के पास झरना 


jatmai temple chura

इस स्थान पर आके लोग एक अलग ही अनुभव का अहसास करते है | तथा प्रकृति से  रूबरूब होते है यह पर झरनो पर लोग स्नान करते है तथा जल क्रीडा का लुप्त उठाते है इस स्थान पर भक्त सहज ही खीचे चले आते है | इस स्थान के आस पास जंगली जानवर का निवास स्थान है | और जानवर इसी के जल से अपनी प्यास बूझाते है
यहाँ पर माता को वनदेवी के नाम से जाना जाता है माता का मंदिर विसाल चट्टान के उपर बनी हुई है जो काफी अधभुद है माता रानी एक चट्टान मे खोल के नीचे निवास करती है उसके निवास स्थान से जल की धारा निकलती रहती है यही मंदिर प्रांगन  के समीप एक भव्य गुफा है गुफा के अंदर  माँ काली अपनी दो बहनों के साथ विराज मान है | यहाँ  पर एक विशाल शिव मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है | मंदिर से आगे यदि आप जाते हो तो आपको एक विशाल हनुमान जी कि प्रतिमा मिलती  है जिसमे हनुमान जी  भगवान राम और लक्ष्मण को अपने हातो पर उठाये हुवे है |
विशाल हनुमान प्रतिमा 

temple in chhattisgarh
प्रवेश द्वार 

jatmai mata
वनदेवी  माँ  जतमई 

यहाँ पर साल के दोनो नवरात्रि मे भक्तो के द्वारा मनोकामना ज्योति जलायी जाती है माता के इन नव दिनों में माता के भजन कीर्तन से पूरा वातावरण गूंज  उठता है भक्त अपनी मुरादे लेके यहाँ  आते है और झोली भरकर वापस जाते है
यही मंदिर के समीप एक शेर गुफा है जिसमे कभी शेर का निवास स्थान रहा होगा लेकीन पर्यटक तथा आवागमन  के कारन वह अब इस स्थान को छोड़ कर कही दूर चला गया है |
सिद्ध बाबा
माता रानी के मंदिर से ठीक पहले एक स्थान है जिसे सिद्ध बाबा का स्थान कहा जाता है कहते है आज से 400 से 500 पहले एक साधू रहते थे और आज भी उसका एक चिमटा उस स्थान पर है | जिसे लोग बड़ी श्रधा के साथ पूजा अर्चना  करते है|
कैसे पहुचे :- रायपुर से इसकी दूरी लगभग 76 कि.मी हैयह पहुचने के लिए उत्तम सडक मार्ग निर्मित है| यह स्थान पर पिकनिक आदि मनाने के लिए उत्तम स्थान हैयह क्षेत्र गरियाबंद जिले के छुरा ब्लाक के अंतर्गत आता है |
पास के अन्य तीर्थ यहाँ से आगे घटारानी के दरबार पंहुचा जाता उस स्थान पर प्राकृतिक झरना है| गरियाबंद के रास्ते कचना ध्रुवा के दर्शन किया जाता है  पैरी नदी के समीप  होते हुवे गरियाबंद पंहुचा  जाता है | जिला मुख्यालय  से 2 कि.मी बगल  में विशाल शिवलिंग है  जिसे भूतेश्वर नाथ कहा जाता है उसके दर्शन किया जा सकता है|

भक्तो से निवेदन :- है कि इन प्राकृतिक स्थान पर ज्यादा कूड़े करकट प्लास्टिक कि थैलिलो का प्रयोग ना करे तथा कूड़े करकट का उचित प्रबंधन करना चाहिए यत्र तत्र फेकना नहीं चाहीये तथा किसी प्रकार का तोड़ फोड़ नहीं करना चाहेए तथा अपनी मर्यादा में रहना चाहिये आनैतीक कार्य नही करना चाहिए रास्ता बड़ा दुर्गम है धीमी गति में चलना चाहिए|

इन्हे भी जरूर देखे :-