Tuesday, August 15, 2017

Jatmai Ghatarani Temple,Gariyaband,Chhattisgarh (जतमई माता मंदिर गरियाबंद छत्तीसगढ़ )

जतमई माता मंदिर गरियाबंद छत्तीसगढ़ 
घने जंगलो चट्टानों झरनो के बीच में निवास करती है | माँ जतमई ,
jatmai temple
मुख्य मंदिर 

माता के दर्शन तथा झरनो का आनंद लेने के लिए लाखो कि संख्या में भक्त गन आते है | यह स्थान पर एक प्राकृतिक झरना है जो यहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र है| इसी के चलते यहाँ हर समय भक्तो का ताता लगा रहता है 
jatmai waterfalls gariyabandh
जतमई माता मंदिर 


jatmai temple chhattisgarh
 मंदिर के पास झरना 


jatmai temple chura

इस स्थान पर आके लोग एक अलग ही अनुभव का अहसास करते है | तथा प्रकृति से  रूबरूब होते है यह पर झरनो पर लोग स्नान करते है तथा जल क्रीडा का लुप्त उठाते है इस स्थान पर भक्त सहज ही खीचे चले आते है | इस स्थान के आस पास जंगली जानवर का निवास स्थान है | और जानवर इसी के जल से अपनी प्यास बूझाते है
यहाँ पर माता को वनदेवी के नाम से जाना जाता है माता का मंदिर विसाल चट्टान के उपर बनी हुई है जो काफी अधभुद है माता रानी एक चट्टान मे खोल के नीचे निवास करती है उसके निवास स्थान से जल की धारा निकलती रहती है यही मंदिर प्रांगन  के समीप एक भव्य गुफा है गुफा के अंदर  माँ काली अपनी दो बहनों के साथ विराज मान है | यहाँ  पर एक विशाल शिव मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है | मंदिर से आगे यदि आप जाते हो तो आपको एक विशाल हनुमान जी कि प्रतिमा मिलती  है जिसमे हनुमान जी  भगवान राम और लक्ष्मण को अपने हातो पर उठाये हुवे है |
विशाल हनुमान प्रतिमा 

temple in chhattisgarh
प्रवेश द्वार 

jatmai mata
वनदेवी  माँ  जतमई 

यहाँ पर साल के दोनो नवरात्रि मे भक्तो के द्वारा मनोकामना ज्योति जलायी जाती है माता के इन नव दिनों में माता के भजन कीर्तन से पूरा वातावरण गूंज  उठता है भक्त अपनी मुरादे लेके यहाँ  आते है और झोली भरकर वापस जाते है
यही मंदिर के समीप एक शेर गुफा है जिसमे कभी शेर का निवास स्थान रहा होगा लेकीन पर्यटक तथा आवागमन  के कारन वह अब इस स्थान को छोड़ कर कही दूर चला गया है |
सिद्ध बाबा
माता रानी के मंदिर से ठीक पहले एक स्थान है जिसे सिद्ध बाबा का स्थान कहा जाता है कहते है आज से 400 से 500 पहले एक साधू रहते थे और आज भी उसका एक चिमटा उस स्थान पर है | जिसे लोग बड़ी श्रधा के साथ पूजा अर्चना  करते है|
कैसे पहुचे :- रायपुर से इसकी दूरी लगभग 76 कि.मी हैयह पहुचने के लिए उत्तम सडक मार्ग निर्मित है| यह स्थान पर पिकनिक आदि मनाने के लिए उत्तम स्थान हैयह क्षेत्र गरियाबंद जिले के छुरा ब्लाक के अंतर्गत आता है |
पास के अन्य तीर्थ यहाँ से आगे घटारानी के दरबार पंहुचा जाता उस स्थान पर प्राकृतिक झरना है| गरियाबंद के रास्ते कचना ध्रुवा के दर्शन किया जाता है  पैरी नदी के समीप  होते हुवे गरियाबंद पंहुचा  जाता है | जिला मुख्यालय  से 2 कि.मी बगल  में विशाल शिवलिंग है  जिसे भूतेश्वर नाथ कहा जाता है उसके दर्शन किया जा सकता है|

भक्तो से निवेदन :- है कि इन प्राकृतिक स्थान पर ज्यादा कूड़े करकट प्लास्टिक कि थैलिलो का प्रयोग ना करे तथा कूड़े करकट का उचित प्रबंधन करना चाहिए यत्र तत्र फेकना नहीं चाहीये तथा किसी प्रकार का तोड़ फोड़ नहीं करना चाहेए तथा अपनी मर्यादा में रहना चाहिये आनैतीक कार्य नही करना चाहिए रास्ता बड़ा दुर्गम है धीमी गति में चलना चाहिए|

इन्हे भी जरूर देखे :-


2 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर लेख एंव सराहनीय कार्य मेरे मित्र भाई देवेंद्र चंद्राकर

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई वृन्दावन पटेल|

      Delete

आपके सुझाव ही हमे सुधार हेतु प्रेरित करेंगे