Konark Sun Temple , Odisha (कोर्णाक सूर्य मंदिर-ओडिशा-भारत)

ओडिशा के पावन धरा पर पुरी क्षेत्र के समुद्र किनारे विशाल व विश्व विख्यात सुर्य मंदिर स्थीत है। ईस मंदिर मे सूर्य कि पहली किरण मंदिर के गर्भ गृह मे स्थीत सूर्य कि प्रतिमा पर पडती थी 
Odisha,Konark Sun Temple

konark Mandir

Konark Sun Temple

Konark Sun Temple,india

ईस मंदिर के अंदर चुम्बक लगी थी जिसकी मदद से यहा कभी सैकडो टन प्रतिमा हवा मे तैरा करती थी मंदिर के शिखर पर लगे चुम्बक पत्थर कि वजय से मंदिर के समिप समुद्र के किनारे जाने वाले जहाजो का कम्पास फेल हो जाता था और गलत दिशा बताता था जिसकी वजय से जहाज दूर्घटना का शिकार हो जाते


Konark odisha

जिस कारण पुर्तगालियो को भारी नुकसान उठाना पडता था पुर्तगालियो ने ईसका राज का पता लगा लिया और मंदिर के शिखर पर लगे चुम्बक को चोरी कर ले गये और बंगाल के सुल्तान सुलेमान खान कर्रानी जिसे काला पहाड भी कहा जाता है जिसने ईस मंदिर को बार बार लूटा भारी नुकसान पहुचाया गया मंदिर की मुर्तिया खजाने को चोरि कर ले गये शिखर को बारूद से उडा दिया जैसे हि शिखर गिरा मुख्य मंदिर टूट गया क्योकि मंदिर का प्राण उसके शिखर पर था (पुरी के पंडितो ने यहा कि मुख्य प्रतिमा को पवित्र बनाये रखने के लिये बालू मे दबा दिया )आज यह प्रतिमा पुरी के जगन्नाथ मंदिर मे है।

कोर्णाक का सूर्य मंदिर जिसे अग्रेजी मे ब्लैग पगोडा भी गया है।

ईसे लाल बलुवा पत्थर और काले ग्रेनाई पत्थर से 1236 - 1234 ई पू मे गंग वंश के राजा नृसिहदेव बनाया गया था।

यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिध्द स्थलो मे से एक है।
ईसे सन 1974 मे युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया है।

कलिग शैलि मे निर्मत यह मंदिर सूर्य देव (अर्क) के रथ के रूप मे निर्मित है।

इस स्थान पर श्री कृष्ण भगवान के पुत्र साम्भ ने सुर्य की कडी तपस्या कर कोड रोग से मुक्ती प्राप्त किया था।
सूर्य के काल्पनिक रथ के समान इस मंदिर कि आकृती है।

Konark Sun Temple

konark


12 एकड मे फैला यह मंदिर जिसको बनाने मे 1200 सौ मजदूर व 12वर्ष मे यह मंदिर का निर्माण किया था।

ईस मंदिर का मुख्य वास्तु कार विशु मोहराना था। उसके 12 वर्ष के पुत्र धर्मपथ मोहराना ने ईस मंदिर के शिखर पर 250 टन का चुम्बक लगाया था। और वहा से कुदकर अपनि जान दि थी।
ईस मंदिर के पिछे सुर्य की पत्नी संध्या और छाया की मंदिर बनि हूई है।
संपूर्ण मंदिर स्थल को एक बारह जोडि चक्रो वाले सात घोडो से खीचे जाते सूर्य देव के रथ के रूप मे बनाया गया है मंदिर की संरचना जो सूर्य के सात घोडो द्वारा दिव्य रथ को खिचने पर आधारित है।
Konark Sun odisha

 अब ईनमे से एक हि घोडा बचा है। इस रथ की पहिये जो कोर्णाक कि पहचान बन गये है। बारह चक्र साल के बारह महिने को प्रतिबिंबित करते है जबकि प्रत्येेक चक्र आठ अरो से मिल कर बना है जो दिन के आठ पहरो को दर्शाते है। जिसमे सटिक समय का पता लगाया जाता है।ईस
मंदिर मे विषाल से विषाल ढाचा और महिन से महिन नक्कासी मंदिर के ईन्च ईन्च मे देखने को मिलति है।

ईस मंदिर मे सूर्य देव कि तीन प्रतिमा है।
(1) बाल्यकाल -उदित सूर्य
(2) युवावस्था- मघ्यान सूर्य
(3) प्रौढपस्था- अस्त सूर्य

ईसके प्रवेष द्वार पर दो सिह हाथियो पर आक्रमन होते हूवे रक्षा मे तत्पर दिखाई देते है।

singh in konark

यह कोर्णाक मंदिर वास्तु दोष के कारण मात्र 700 वर्षो मे हि ध्वस्त हो गया इसके अवषेष को एक संग्रालय मे सजो के रखा गया है।

3 comments:

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