Sunday, February 19, 2017

Rajiv Lochan Temple Rajim( राजीव लोचन मंदिर राजिम)

Rajiv Lochan Temple Rajim छत्तीसगढ़ का प्रायग
Rajiv Lochan Temple Rajim
Rajiv Lochan Temple Rajim
पूर्वी  रेल्वे लाईन में रायपुर से राजिम  तक एक छोटी रेल्वे लाइन जाती है| रायपुर से  47  कि.मी. कि दूरी पर राजिम स्थित है| यहाँ तक जाने के लिए उत्तम सड़क मार्ग है| व नियमित रूप से बस,ऑटो व अन्य साधन उपलब्ध है, यहाँ पर महानदी कि दो और सहायक नदिया पैरी और सोट मिलती है| इसलिए इसे त्रिवेणी
संगम भी कहा जाता है| यहा पर भगवान श्री राजीव  लोचन का प्राचीन मंदिर है| 
Lord Rajiv Lochan,Rajim
भगवान राजीव लोचन 

मंदिर में भगवान नारायण (विष्णु) कि चतुर्भुज मूर्ति काले रंग कि पत्थर से बनी है |
Rajiv Lochan Temple Rajim Chhattisgarh
 श्री राजिव लोचन 
भगवान कि प्रतिमा सिहाषन पर स्थित है| 
अपने हाथो में शंक ,चक्र ,पद्म ,गदा धारण किये हुवे विराजमान है| मंदिर के भीतर दशावतार तथा बाल मुकुंद जी के मंदिर है| राजिम बस्ती में लगभग २२ मंदिर हैत्रिवेणी संगम पर कुलेश्वर  शिव मंदिर है| यह मंदिर विशाल है|  कहा जाता है कि इसकी मूर्ति श्री जानकी जी के द्वारा स्थापित किया गया है| पास में एक झरना है| और समीप ही धौम्य ऋषि का आश्रम है|
इसे पांच कोसी धाम भी कहा जाता है| मंदिर में लगी सुचना से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस प्रकार समुद्र के भीतर त्रिशूल कि नोक पर कांशीपूरी कि रचना हुई है| एवं समुद्र के उपर शंख पर
dandaneshwar mahadev
द्वारिकापूरी कि रचना हुई है उसी अनुरूप पांच कोस का लम्बा चौड़ा  वर्गाकार सरोवर है| बीच में कमल का फूल है| फूल के पांच पंखुड़ी के उपर पांच स्वयंभू महादेव विराजमान है| जिसे पांच कोसी धाम के नाम से जाना जाता है| फूल के मद्य पोखर में कमल क्षेत्र पद्मावती पूरी राजिम नगरी निर्मित है| जहा अति प्राचीन देव शिल्पी विश्वकर्मा द्वारा निर्मित मंदिर जहा प्रभु श्री राजीव लोचन विराजमान है जो त्रिलोकीनाथ तीर्थ राज के रूप में जाने जाते है यहाँ सदृश्य त्रिवेणी संगम
जिसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग राज माना गया है राजिम में जैन मंदिर भी है| यहाँ पर जैन समुदाय का विशेष आस्था का केंद्र है|इनके भी दर्शन कर पुण्य कमाना चाहिए और उनकी  त्याग और बलिदान से हमें प्रेरणा  लेनी चाहिए|  राजिम छत्तीसगढ़ का मुख्य तीर्थ है| यहाँ पर जगन्नाथ  लौटे यात्री प्रायः राजिम लोचन के दर्शन को जरुर आते है| यहाँ पर श्री राम मंदिर शिल्प कला के भव्य प्रतिक के रूप में उभरा है|
राजिम का प्राचीन नाम कमल क्षेत्र  पदमपुर आदि नामो से जाना जाता था| इस स्थान पर अनेको राज धरती माता कि गोद में समाये हुए है| यहाँ पर खुदाई  में  मूर्ति व मंदिर के अवशेष मिलते है|
sakshi gopal rajim


मंदिर का निर्माण लगभग ५ वी सदी में हुवा था| नलवंशीय शाशक विलासतुंग एवम कलचूरि शासक जाजल्देव प्रथम के समय इस मंदिर का जीर्णोद्वार  करवाया गया था|  इस मंदिर के भीतर पर सँवत  ८९६ याने ११४५ ई का एक लेख लगा हुवा है |उसी से ये जानकारी मिला है|

राजिम छत्तीसगढ़ का एक पवित्र तीर्थ स्थल है| यहा पर भगवान विष्णु के भक्त के साथ - साथ शिव जी के लाखो भक्त दिखयी देते है|  मंदिर कि सुन्दरता वहा का वातावार सभी भक्तो को अपनी ओर  खीच लेती है| भगवान राजीव लोचन के प्रतिमा इतनी मनमोहक है कि इसके यदि आप एक बार दर्शन कर लोगे तो उसे ब़ार ब़ार देखने को इच्छा मन में बनी रहती है| और भगवान कि प्रतिमा से  निगाहे नहीं हटती है प्रभु कि मोहनी सूरत मन मंदिर में समां जाती है| यहा  

rajim mahakumbha

पर समय समय पर भगवान का विशेष सृंगार किया जाता है जो भगवान कि सुन्दरता पर चार चार लगा देती है जो देखनी लायक होती है| यहाँ पर श्री कुलेश्वर घाट पर सावन मास में बोल बम के नारे से पूरा वातावरण गूंज उठता है शिव भक्तो का ताता लगा रहता है महाशिवरात्री का यहाँ पर विशेष  महत्व रखता  है|

यहाँ पर प्रती वर्ष माघ पूर्णिमा  को विशाल मेले का आयोजन होता है |  जिसमे सामिल होने को लाखो श्रद्धालु  मेले में यहाँ आते है| यहाँ जन समुदाय के साथ- साथ साधू संतो इसमें सामिल होते है जिसकी भीड़ देखने के योग्य रहती है| यहा पर तरह-तरह के धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है| त्रिवेणी संगम होने के कारण यहाँ पर पिंड दान ,श्राद ,तर्पण कार्य करने के पश्चात भगवान राजीव लोचन के दर्शन किया जाता है| भगवान का प्रसाद चावल कि पीडिया

pidiya prasad rajim lochan
से बना होता है इस प्रसाद में किसी प्रकार का  जाती संप्रदाय का छुवा-छुत  नहीं माना जाता है| भगवान में आस्था करने वाले लोग बड़ी श्रधा के साथ इस  प्रसाद को ग्रहण करते है|और ग्रामवासी तो प्रसाद को बड़े आदर के साथ अपने घर में सहेज के रखते है| और मानते है कि यदि कोई व्यक्ति मरने वाला होता है तो उसको खिलाया जाता है| कहते है कि खाने वाला व्यक्ति स्वर्ग का भागीदार बन जाता है ,दिवाली में यदि महाप्रसाद नहीं है तो गौ माता कि खिचड़ी में थोडा प्रसाद मिलाया जाता है|

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11 comments:

  1. Great temple and there's beautiful shape and design of temple. This temple is very old but that's shine very much. And near this temple a very big river

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  2. Rajim is best place for family tour and friends enjoyment it is a Holi place of Chhattisgarh called as Prayag of Chhattisgarh the site of river near Rajiv Lochan Mandir and Lord Rajiv Lochan is very beautiful and here Prasadee of the Rajiv Lochan is very sweet and tasty let's try

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  3. Beside the Mahanadi river.it's very famous place for Kumbh mela during the end of January.

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  4. It is one of the best place to visit in Chhattisgarh state of India. You can plan a holiday trip with your family and friends and visit here, Jatmai and Ghatarani in one go....it is situated near Mahanadi river. Ar the mid of the river the is Kuleshwar Mahadev temple..

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  5. One of the oldest temple. You will see deferenty dressed lord vishnu everyday. They serve a unique prasad pidiya.

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  6. very nice place.
    realy heart touching place.
    fabruari-march month is best time for journey this area.
    please come one time for journey.
    this is indias 5th kumbh mela. tourist place.

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  7. यहां 3 नदी मिलती है। मिनी कुंभ celibrated है।

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  8. The holy confluence of three rivers Mahanadi, Pairi and Sondur, called Triveni Sangam is at Rajim. Rajim is also known as the "Prayag" of the Chhattisgarh.

    Rajim is famous for its rich cultural heritage and the beautiful ancient temples. Shri Rajiv Lochan Mandir,dedicated to Lord Vishnu is at Rajim. The temple structure is supported by twelve towered columns embroidered with stone carvings, which bear the faces of the various gods of the Hindu mythology. The temple is an important religious construct visited by devotees from all over the globe who arrive to offer their prayers to the Lord Vishnu. Other temples dedicated to the various incarnations of Lord Vishnu like the Vamana and the Narasimha are in close proximity of the Rajiv Lochan Mandir.
    Kuleshvara Mahadeva Mandir stands in glory in the city even in its ruinous state. The statue of Lord Buddha in the meditative position under the Bodhi tree carved out of black stone is also popular in the city. ghatoria mahakali mandir is another temple in the banks of mahanadi.
    The annual Rajim Lochan Mahotsav is held between the 16th of February and the 1st of March. The various music and dance performances conducted in the fair displays the rich culture of Rajim.

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  9. Beautiful place and God Jaganath temple very lovely look.

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  10. One of the ancient Lord vishnu temple in Chhattisgarh

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  11. Great temple and there's beautiful shape and design of temple. This temple is very old but that's shine very much. And near this temple a very big river

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