Sunday, January 6, 2019

Ganesh Temple Barsur (गणेश मंदिर बारसुर )

Barsur - Ganesh Temple In Chhattisgarh गणेश मंदिर - बारसुर 



chhattisgarh ke dharmik sthal
Ganesh Temple Barsur
बारसूर शब्द की उत्पत्ति बालसूरी शब्द से मानी जाती है, बालसूरी कालान्तर में बारसूरगढ़ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। प्राचीन युग में यह नगरी बेहद समृध्द व वैभवशाली नगरी थी, बारसूर के चारों दिशाओं में यहाँ के शासकों के द्वारा 10-10मील दूर तक कई मंदिर और तालाब बनवाये जिस कारण ईसे मंदिरो और तालाबो कि नगरी भी कहा जाता था, जीसमेें से कुछ आज भी मौजूद हैं, 
छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल
शिवलिंग -बारसुर 

Dantewada Tourism

Battisa Shiv Temple Barsur

पौराणिक कथा के अनुसार दैत्येन्द्र बालासूर की पुत्री उषा और उनके मंत्री कुमांद की पुत्री चित्रलेखा के बीच घनिष्ठ मित्रता थी, भगवान गणेश इन दोनों के ही आराध्य देव थे, इनकी भक्ति देख बानासुर ने एक भव्य मंदिर का निर्मान करवाया जिसमे भगवान गणेश की दो प्रतिमाएं यहाँ एक ही स्थान पर स्थापित करवाईं, दोनों ही सखियां नित्य इनकी पूजा-अर्चना किया करती थी, भगवान श्री गणेश की ये दोनों प्रतिमाएं एकदन्ती हैं, बड़ी प्रतिमा की ऊँचाई 7 फीट है, जबकि छोटी प्रतिमा साढ़े पाँच फीट की है। स्थापना के समय से ही इन प्रतिमाओं का संरक्षण शासक करते आ रहे। मंदिर परिसर में प्राचीन शिव मंदिर मामा भाॅजा मंदिर बत्तीसा मंदिर चॅन्द्रादित्य मंदिर के भग्नावशेष आज भी मौजूद हैं।


Sunday, May 6, 2018

Mama Bhanja Mandir Barsur (मामा भांजा मंदिर बारसूर - दंतेवाडा- छत्तीसगढ़ )


Mama Bhanja Temple History
दंतेवाडा जिले में वैसे तो अनेक प्राचीन पुरातात्विक दार्शनिक स्थलो  से भरा पड़ा है| 
मगर हम आज बारसूर ग्राम के मामा भांजा मंदिर कि बात करते है| यह मदिर काफी सुन्दर व अधभुद है| मगर ठीक से रखरखाव ना होने के कारण जर्जर अवस्था में है फिर भी आस पास के मदिर कि तुलना में यह मदिर ठीक है| 

Mama Bhanja Temple In Chhattisgarh
मामा भांजा मंदिर बारसूर 

इसका श्रेय भारत के पुरातात्विक विभाग को जाता है जिसके वजह से आज वर्तमान पीढ़ी इस प्राचीन मंदिर के दर्शन कर लाभ ले रहे है|
इस मामा भांजा मंदिर को बनाने में विशेष प्रकार के बलुई पत्थरो का प्रयोग किया गया है | छत्तीसगढ़ के अधिकतर मंदिर जैसे खल्लारी का नारायण मंदिर फिंगेश्वर का फनिकेश्वर नाथ मंदिर भोरमदेव मंदिर ,जांजगीर का विष्णु मंदिर आदि मंदिर  कि बनावट एक ही प्रकार के नजर आती है| यह मंदिर काफी उची है| इस मंदिर कि दीवारों पर कलात्मन शैल चित्रों को उकेरा गया है| जो उस समय कि अधभुद कलाकारी को आज भी दर्शाता है| मंदिर के शीर्ष के थोड़े निचे अगल – बगल में दो शिल्पकार मामा व भांजा कि मुर्तिया है| इस मंदिर परिसर पर अन्य मंदिरे भी है सभी अब भग्न अवस्था में है| शेष में देखे तो  दो प्राचीन गणेश प्रतिमा ही बची हुई है|

बारसूर के अन्य मंदिर के लिये यहाँ क्लीक करे


वैसे यह मामा भांजा मदिर मुख्य रूप से शिव मंदिर है| मगर इस मंदिर के नाम करण के पीछे अजब गजब कथा किद्वंती सुनने को मिलती है| स्थानीय निवासियों व कुछ इतिहास कारो के अनुसार यह बताया जाता है कि उस समय का तात्कालिक राजा परम शिव भक्त हुवा करता था तथा शिव के प्रति अपनी सच्ची आस्था स्वरुप व भगवान को प्रसन्न करने व लोक कल्याण के लिए एक ऐसा नायाब शिव मंदिर निर्माण करवाने का का स्वप्न देखा जिसे महज एक दिन में निर्माण किया जाये जिससे राजा का यश कीर्ति चारो दिशा में फैले साथ ही उसके कुल का नाम हो अपनी इसी अधूरी इच्छा को पूरी करने के लिए अपने राज्य के दो प्रसिद्ध शिल्पकार को बुलाया (स्थानीय निवासियों के अनुसार वह  शिल्पी कार कोई आम मानव नहीं थे वह कोई देवलोक से भेजे गए कोई देव थे अथवा यक्ष गंधर्व थे| कुछ लोक तो दोनो को देव शिल्पी विश्वकर्मा के वंशज बताते है| मगर इन सबका कोई साक्ष्य प्रमाण नहीं है| )


Barsur In Chhattisgar
मामा भांजा मंदिर बारसूर - दंतेवाडा

और राजा ने आदेश दिया एक शिव मंदिर का निर्माण किया जाये जिसे केवल एक ही दिन में पूर्ण किया जाने कि शर्त रखी | तब दोनों शिल्पकार राज्य आज्ञा स्वरुप अपनी ऐसे कारीगरी दिखाई जो आज के वर्तमान युग के लिए किसी स्वप्न से कम नहीं है| उन दोनों ने महज एक ही दिन में भव्य मंदिर का निर्माण कर दिया जो किसी चमत्कार से कम नहीं था|  {सोचनीय विषय यह है कि उस समय कोई आज कि तरह साधन नहीं हुवा करता था मगर उन लोगो ने कैसे इतने मोटे मोटे चट्टानों को इतनी उचाई पर कैसे पहुचाया कैसे चट्टानों को खोदकर नक्कासी किया कैसे उसके पत्थरो के जोड़ का पता नहीं चलता है | शायद उस समय कोई विद्या जानते थे या सिद्धि प्राप्त किये रहे होंगे जिससे चट्टानों को हवा में तैराया जाता रहा होगा यह सभ अधभुद कारनामे भारत में ही नहीं अन्य देशो में भी देखा जा सकता है|}

Dantewada Chhattisgarh


मंदिर पूर्ण होने के पश्चात राजा ने यहाँ शिवलिंग व गणेश कि प्रतिमा का स्थापना कि तब राजा ने उन शिल्पकारो को बुलाकर उनका आभार व्यक्त किया और उनका मेहनताना दिया और बोला कि यह मंदिर आज से तुम दोने मामा भांजा के नाम से जाना जायेगा तब से लेकर आज तक उस मंदिर को मामा भांजा के नाम से जाना जाता है|   
    
टिप :- इस लेख के माध्यम से हम मंदिर से जुडी कुछ जानकारी आपके सामने रख रहे है हमारा उद्येश किसी धार्मिक कथा व इतिहास को छेड़छाड़ करना नहीं है अपितु अपनी बात आपके सामने रखना है | यदि आपके कुछ  सुछाव है| निचे दिए गए कमेंट बाक्स पर अपनी राय जरुर दे| आपके सुझाव ही हमें सुधार हेतु प्रेरित करेंगे| 

प्रस्तुती - cgdekho1.blogspot.com
फोटो   - गिरिश कुमार श्रीवास 

Saturday, May 5, 2018

Chandradity Temple Barsur (चन्द्रादित्य मंदिर बारसूर )

CHANDRADITYA TEMPLE,BARSUR

Geo-coordinates-Lat.19008’16”N;Long.82022’57”E  Location-Village-Barsur,Tehsil- Dantewada  District-Dantewada(Chhattisgarh)


Chandradity Temple Barsur
   
The temple located near Chandradityesvara tank in Bhumij Style dedicated chief (Mahamandalesvara) under a Chhindaka

Nagavamshi King Jagdev Bhushan,as evident from a Telugu inscription of samvat 983 (1061 AD) found at Barsoor.

Chhattisgar Ke Dharmik Sthal
Barsur Chandradity Temple 

Barsur Chandradity Temple
Barsur Chhattisgar

Garbhagriha is pancharatha on plan and atteched with a square pillared mandapa in front.The exterior walls of jungha portion contain image of Brahma,incarnations,of Vishnu, Prajapati Daksha, Uma-Maheshvara and also few worth mentioning excellence.The temple seems to be constructed during 11th century AD   

All photos have been drawn by Girish Kumar Shrivas    
                                                                         
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